तन्हा
नहीं मेरा कोई दोस्त नहीं
हर जगह इक तन्हाई है ।
खुदा भी है रूठा मुझसे
काली घटा सी छाई है ।।
आशाएँ बहुत हैं मुझे
शायद यही मेरी एक बुराई है ।
जान छिड़क दी है तुझपे
गायब मेरी परछाई है।।
तेरे अश्क तेरा गम सब मेरा
मेरी मुस्कराहट तेरी बनाई है।
तेरे लिए हर हद गुज़र कर
अपनों से मात खाई है ।।
तू चला गया अकेला छोड़
पीछे ना मुङने की कसम खाई है ।
खड़ी थी मैं इंतज़ार में वहीं
आज मेरे वजूद ने ठोकर खाई है ।।
कितना खो दिया मैंने खुद को
ये बात समझ अब आई है ।
तेरे चले जाने का दर्द नहीं
दर्दनाक ये तन्हाई है ।।
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