मैं भी एक सिपाही हूँ
हर दिन एक नयी शुरुआत के साथ
एक नयी आस के साथ
की आज मेरा दिन है
मैं रोज़ एक नयी जंग लड़ने चल पड़ती हूँ।
हाथो में बैग लिए, आँखों में चमक
और चेहरे पर एक अजीब सा राज़ लिए
मैं सफ़र के लिए निकलती हूँ।
बंदिशें लगाता जहाँ मुझ पे
उन सब से लड़ झगड़ती हूँ।
रास्ते में कठिनाइयाँ बहुत हैं
मैं फिर भी आगे बढ़ती हूँ।
सिखाया जाता मुझे जीने का ढंग
दुनिया तय करती कपड़ों का रंग
इन गाली तानों के बोझे से
मैं दूर कहीं गुज़रती हूँ…
हाँ, मैं भी एक सिपाही हूँ
कई ज़िंदगियों के लिए लड़ती हूँ।
No comments:
Post a Comment